Saturday, January 30, 2010

लो जी, मेघालय से दिल्ली!

दिल्ली में कुछ सहेलियों ने बताया था
कि यहाँ लोगों की आँखें घूरती कुछ ज्यादा हैं,
इसपर ध्यान थोड़ा कम देना, कहीं तुम परेशान न हो जाओ।
अबे भला ध्यान तो मैं कम दे दूं सही
पर यह जानवर हैं क्या कि उल्लू कि तरह घूरे जाएँ,
मैं तो शहर में रहने आई थी, मार चिड़ियाघर में नहीं।
और एक बात तो मुझे समझ ही नहीं आई,
कि चीन न मैंने आज तक देखा,
न वहां जाने की कभी कोई ख़ास ख्वाइश जताई
तो भाई, यहाँ लोग सठियाय गए हैं क्या
जो पड़ोस में रहते हैं, फिर भी आँखें हैं मानों दूरबीन की
दिल्ली के ये सब अच्छे-खासे भारत वासी
और जो मैं खासी तो मैं चीन की?
अब सुनो, कुछ नयी हवा हमें चलानी पड़ेगी
एक प्यार भरी चपेट उनको लगानी पड़ेगी,
ऐसी बातें हैं जिनकी, उन सब की
ये चिंकी-पिंकी की पट्टी भुलानी पड़ेगी,
नयी दोस्ती की यही तो ख़ास बात है
जो मानो लड़ाई की रात है, तो
सुलह की सहर किसी को तो दिखानी पड़ेगी।

Friday, January 1, 2010

अरे जाओ

अरे जाओ, ये इश्क भी क्या इश्क
जिसमे
बातें बनाना तुम्हें आता ही नहीं,
पहाड़ों पर चढ़ना-चढ़ाना मालूम है लेकिन
चने के झाड़ चढ़ाना तुम्हें आता ही नहीं।
मुनासिब बातों का तो हर जगह बाज़ार है
ज्यादा
तर से तो सच का ही करोबार है,
सिर्फ़ तुमसे थी उम्मीद कि झूठ बोलोगे ज़रा
बढ़ा-चढ़ा
कर बताना तुम्हें आता ही नहीं।
ये सब्र का सबक ऐंवें ही मीठा बतातें हैं
भला खामोशी से कभी पंछी गाना गाते हैं,
दर्द होता है जब उसका गवाह ही चुप रहे
यूँ सता कर मनाना तुम्हें आता ही नहीं।
मालूम है तुम्हारे चाहने वाले हैं और कई
तुम्हारे सर के लिए सिरहाने हैं और कई,
यूँ शमा है जहाँ, वहां पतंगे फिरते हैं ही

इक भी पतंगे को बचाना तुम्हें आता ही नहीं।


Arre Jao

Arre jao, ye ishq bhi kya ishq
Jisme baatein banana tumhe aata hi nahi
Pahado par chadhna-chadhaana aata hai lekin
Chane ke jhaad chadhaana tumhe aata hi nahi
Munasib baaton ka to har jagah baazar hai
Jyadatar se to sach ka hi karobar hai
Sirf tumse thi ummeed ki jhooth bologe zara
Badha-chadha kar batana tumhe aata hi nahi
Ye sabr ka sabak aivein hi meetha batate hain
Bhala khamoshi se kabhi panchee gana gate hain
Dard hota hai jab uska gavah hi chup rahe
Yun sata kar manana tumhe aata hi nahi
Maloom hai tumhare chahne wale hain aur kai
Tumhare sar ke liye sirhane hain aur kai
Yun shama hai jahan wahan patange phirte hain hi
Ek bhi patange ko bachana tumhe aata hi nahi