Wednesday, April 27, 2011

London night fox


Say, where do you hide
when it's day, where do
you disappear in the light,
is it something in London
that's good only at night?
Is there something to be
told only in the dark, is it
scribbled on the kerb, is it
lost in the park, or is it that,
like me, you too are a bit of
a creep, always getting to
work when it's time to sleep.

Friday, April 15, 2011

मौत, इतना इतरा मत - जॉन डन

मौत, इतना इतरा मत, जो कुछ ने तुझे
बड़ी और डरावनी क्या कहा, ऐसी नहीं है तू,

वो जिन्हें तू सोचती है तूने हरा दिया, वो
मरते नहीं, ना हि मुझे मार सकी है तू गर
आराम और नींद में, जो कि तेरी हि नक़लें हैं,
इतना मज़ा है, तो सोच तुझमें कितना होगा,
एक से एक जल्द चल पड़ते हैं तेरे संग, उनके
बदन कि आह है तू, उनकी आज़ाद रूह है तू
तू तो ग़ुलाम है, किस्मत कि, इत्तिफ़ाक कि,
हकूमतों कि, बेअक्लों कि, और ज़हर, जंग
और बीमारियों में रहती है, नींद तो हमें अफ़ीम
से भी मिल जाती है, और तुझसे कई बेहतर,
तो तू क्यूं अकड़ाती है; ज़रा सी आँख लगने के
बाद, हमारी सुबह तो उसी कि बाहों में आएगी,
मौत, तू नहीं होगी वहां, मौत, तू मर जायेगी

tr. from English 'Death be not proud', John Donne (1572-1631)


John Donne (1572-1631)

Monday, April 11, 2011

कितनी अच्छी


कितनी अच्छी लिखूं ये नज़्म
कि घुल जाएँ उसमें मेरे सारे ख्वाब
कि खो जाए उसमें वो सारे दिन
तुम्हारे साथ, कि अब याद आयें
तो बस ऐसे कि याद आने पर
खुद नज़्म के लब्ज़ बन जाएँ,
कैसे लिखूं इतना अच्छा कि
खिड़की से बाहर शाम को युं ताकना,
कि देर तक टहलना, कि कभी-कभी
अजीब सा रहना, भी ऐसा लगे कि
शायरों के लिए तो आम है, जो बाकियों
को बस उलझा सा दर्द सा लगे, वो
तो इन शायरों का रोज़ का काम है,
इसी हुनर से तो उनकी ज़िन्दगी बनती है,
कैसे लिखूं इतना बढ़िया कि नज़्म
छिपा ले वो सब कुछ जिससे नज़्म बनती है।

Sunday, April 3, 2011

This Winter - Mangalesh Dabral


Last winter was hard,
I shiver when I remember it now
though this time, the days seem fine.

Last winter, my mother went,
I lost one love letter, lost one job,
don't know where I wandered at nights
don't know which numbers I dialed,
last winter
my things kept falling on me.

This time
I take out the clothes from that last winter,
quilts, caps, socks, scarves
I see them carefully
and think that that time has passed,
why will this winter be hard like before.


tr. from Hindi, 3rd April, 2011
Mangalesh Dabral's Hindi original 'इन सर्दियों में': http://tinyurl.com/3cwc4r8