Sunday, April 29, 2012

बुला लो तमाशेवालों को - स्टीफेन सोनडाइम

tr. from Stephen Sondheim's song 'Send in the Clowns' (1973), with help from Shalini Sharma


अजीब बात है न?
हम अब साथ हैं न?
मैं, आखिर में, यूँ ज़मीन पर
और तुम बीच आसमान।
बुला लो तमाशेवालों को।

क्या ये ख़ुशी नहीं है?
क्या तुम्हें पसंद नहीं है?
एक जो बावला बन के फिरे,
दूसरा जो हिला तक नहीं है?
कहाँ हैं सब तमाशेवाले?
बुला लो तमाशेवालों को।
 
मैं अब हर दरवाज़े को खटखटाता नहीं
तुम्हारे दरवाज़े पर अब जो आता यहीं,
फिर अन्दर गया एक दिन, पुरे रोब के साथ
सारी लाइनें थीं बराबर याद
पर अन्दर किसी को पाता नहीं।

क्या तुम्हें मज़ाक पसंद नहीं?
ये मेरी ही गलती होगी, 
मुझे लगा था जो मैं चाहता हूँ, वही तुम चाहते हो,
माफ़ करना, मेरे अज़ीज़।
लेकिन वो तमाशेवाले कहाँ हैं?
जल्द, बुला लो तमाशेवालों को।
रहने दो, वो तो यहाँ हैं।

अजीब बात है न?
कितनी अटपटी सी,
कि यूँ इतने साल बाद, 
मैं अब सुर चूकने लगा हूँ?
और वो तमाशेवाले कहाँ हैं?
तमाशेवाले तो होने ही चाहिए,
चलो, शायद अगले साल।


Stephen Sondheim












Saturday, April 21, 2012

Jama Masjid, Delhi, 2012

'I am neither in temple nor in mosque,' they are dangerous places,
then, Kabir, why does this mosque look like the serendipitous places?

They tell me 'this courtyard can hold up to 25,000 believers,'
will there be room for one infidel in these stupendous places?

'Aman Rekha' cut into the farthest edge of the minaret,
see how love happens only at the most precipitous places.

They give sarongs to cover our legs, robes to cover our hands,
He knows the body He lent us, why act so precious, places?

Six thousand workers, for a king, over six years, built it,
Take Akhil, for wazoo, their sweat, still in these pious places.


(Thanks to Ravikant and Neil)

Friday, April 6, 2012

मेरे राजा निज़ामुद्दीन

मेरे राजा निज़ामुद्दीन
बहा ले चल, बहा ले चल
जहाँ मैं न हूँ, वहां ले चल

तेरे इश्क़ में जहाँ सर फिरे
जहाँ तू दिखे बस हर सिरे
हर पल तेरी नज़रों में युं
बस अब जिए, बस अब मरे
जहाँ बांधें ना कोई रसम
हर रंज हो जाए भसम
ले चल मुझे ऐसी जगह
तुझे तेरे ख़ुसरो कि कसम

ओ राजा निज़ामुद्दीन
बहा ले चल, बहा ले चल
जहाँ मैं न हूँ, वहां ले चल

जहाँ हर तरफ तेरी बात फैली
हर रात जैसे रात पेहली
मेरी चुनर थाम कर तू  
कर दे अपने रंग से मैली
जहाँ बस तू मेरा यार हो
बस तेरे दर पर प्यार हो
गम सोचे भी आने कि तो
हर बार ख़बरदार हो

मेरे राजा निज़ामुद्दीन
बहा ले चल, बहा ले चल
जहाँ मैं न हूँ, वहां ले चल