Sunday, April 28, 2013

A Sestina

for Anannya Dasgupta

In Portland, Oregon, for the first time
in another country, I held my hands
nervously by my side, waiting to cross;
the traffic did not stop, and I will
later realize that there was something
to press, a red button, to green my way.

In Penn State, she had said 'No way
you are staying in your room this time,
it has been a week, you must do something,
there is this place,' she splayed her hands,
'The Old College Diner, come, we will
get a grilled sticky, come, don't be cross.'

In Delhi, the last time I was cross,
he had said - was there no other way -
'It got serious, Akhil.' 'But you said it will
not.' I asked, 'will there be no more time,'
I asked, will there be none in our hands,
telling myself, there must be something.

'Come here in the fall?' So there was something,
- there always is - will the night cross
half the world now to reach into your hands
this love cast in the dark, will you weigh
it in your hands, and will there be time
for you to see what remains of your will.

Or only in mathematical questions will
John buy forty pomegranates - that's something! -
and no one will question, and yet, the time
when I google map Portland, to cross
St. Helens volcano, again, to see if there is a way
I can fold all of memory into my hands,

you will suspect the compass of my hands,
and by the morning, little by little, you will
find other things to say, 'there is no way
that you will come here,' - I would - 'do something
like this.' The ember lava, then, will cross
from St. Helens into my veins this time.

There is a way - press red - this time,
even if the ocean will be too blue to cross
in my ember hands there is already something.



(Thanks to Stephen Chbosky and Amin Davoodi)

Saturday, April 20, 2013

हार्लेम - लैंग्सटन ह्यूज़

tr. from Langston Hughes's 'Harlem', with help from Sunita Katyal


एक अधूरे सपने का क्या होता है?

क्या वो सूख जाता है
धुप में किशमिश की तरह?
या किसी खुले घाव की तरह  -
पस से भरा, पकता है?
क्या वो सड़े हुए मास सा बदबदाता है?
या पपड़ी बन जाता है
पुरानी चाशनी की तरह?

शायद चुपचाप किसी भारी भोझ की तरह
वो सिर्फ लटकता है

या बम सा फटता है?  

Langston Hughes

Tuesday, April 9, 2013

स्पैनिश जी के लिए

I

तुम्हारी पिछली ईमेल पढ़कर
सोच में पड़ गया

आखिर में तुमनें लिखा था -
'हालाँकि स्पैनिश तुम्हें पढ़नी आती नहीं,
फिर भी लोर्का की ये एक कविता भेज रहा हूँ

'ला सिंको दे ला तारदे' ('शाम के पांच बजे ')

"सफ़ेद चादर लाता हुआ एक लड़का 
ला सिंको दे ला तारदे...
सड़क के किनारे सब चुप खड़े हुए
ला सिंको दे ला तारदे...
शाम के ठीक पांच बजे
पूरी कायनात दम तोड़ रही है...
और हर घड़ी बोल रही है 
- ला सिंको दे ला तारदे..."

II

पर तुम्हारी ईमेल के शुरू में -
'कुएरिदो अखिल'

सबसे पहले मैंने पता लगाया
इस 'क़ुएरिदो' का मतलब

गूगल ट्रांसलेट ने बताया -
'प्रिय अखिल'

III

मैं ये कविता हिंदी में लिख रहा हूँ
क्यूंकि हिंदी तुम्हें पढ़नी आती नहीं

इस ज़ुबां में कुछ भी लिख दूं
बाकी सब समझेंगे

बाकी सब देखेंगे

पर - शुक्र है -
तुम्हारे लिए तो कोई बात ही नहीं --

क्यूंकि
सच पूछो
तो डर लग रहा है

तुमसे कैसे कहूं

कि फिर से आज़माने में
डर लग रहा है

पिछली बार न उसकी गलती थी
न मेरी
न उसका इम्तिहान था, न मेरा
फिर भी उस दिन

- तुमसे
कैसे कहूं,
शायद तुम्हारी जुबां में -

ला सिंको दे ला तारदे
सर्द शाम का जल्द आता हुआ अँधेरा
ला सिंको दे ला तारदे
उस फोन के कटने की आवाज़
ला सिंको दे ला तारदे
बादलों का पर्दों-सा छट जाना

कहीं तुम्हें पता न चल जाए
उन छटते बादलों के पीछे 
उस शाम के चाँद का वो बैंगनी रंग

इसलिए अपनी ज़ुबां में छिपा रहा हूँ

- कहीं मेरी ज़ुबां
तुम्हारी ज़ुबां से न मिल जाए-

अब ये तुमसे कैसे कहूं  
क़ुएरिदो

The Biopic Lecture

मैं अपने लैपटॉप पर नोट्स ले रहा था
जब प्रोफेसर ने कहा 'He loves her
like a madman in 1903.' मुझसे
टाइपिंग करते-करते हुई गलती, और
मैं लिख बैठा 'loved' लेकिन सुनो,
ये तो होना ही था, ये जो 's' और 'd' हैं,
की-बोर्ड पर एक दुसरे से सटके हैं।
किसे पता था love ends like a typo
एक गलत अक्षर, और सब सर पटके हैं,
या फिर क्या पता मुझे कहीं श़क था कि 
वो इश्क नहीं था till the last, जो बना दिया 
मैंने टेंस को present continuous से past