Thursday, February 20, 2014

न्यू मेक्सिको - अनन्या दासगुप्ता

tr. of Anannya Dasgupta's poem 'New Mexico'

आजकल न्यू मेक्सिको फिर से मेरे सपनो में आ रहा है।
हल्की रातें, ज़र्द हवाएं और बुझे-बुझे तारों के शामियाने 
टाउस से ले कर एल्बाकर्की तक। चिकनी मिटटी के सूरज
अस्त हो चुके थे। फिरोज़ी रास्ते भी कजला चुके थे। तुम 
और मैं भूतिया कस्बों से होते हुए और हमारी कार कि 
हेड-लाइट इतनी बर्फ में कुछ हड़बड़ाईं हुईं। उस रात ने 
ऐसा सपना दिखाया जो इस सुबह तक मुझे धरे हुए है।

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