Thursday, June 26, 2014

एक इमरजेंसी का समर्थक

माना कि
अखबार कुछ ढंग का छाप नहीं सकते
दूरदर्शन वाले कोंग्रेसी तलवों के सिवा
किसी के तलवे चाट नहीं सकते, माना कि
इंदिरा जी सभी हदों से आगे निकल रहीं हैं
पर देखिये ट्रेन तो टाइम से चल रहीं है

माना कि
लाख आदमी जेल में सड़ रहा है, माना
दिल्ली का तुर्कमान गेट उजड़ रहा है, माना
बुद्धिमत्ता संजय गांधी को देख शर्मा जाती है,
नेकी उसके सामने आकर कतरा जाती है, माना
माँ-बेटे को समझाने की हर कोशिश विफल रहीं हैं,
पर देखिये, ट्रेन तो टाइम से चल रहीं हैं

माना कि
चीफ-जस्टिस जी की रीढ़ की हड्डी नहीं है, उसके
ऑफिस में इंदिरा जी की तस्वीर से कोई वड्डी नहीं है,
माना की नस बंद होने के बाद फिर खुलती नहीं जी,
माना की जेल की पिटाई के बाद देह हिलती नहीं जी,
माना विपक्ष आजकल क़ैदख़ानों में पल रही है
पर देखिये, ट्रेन तो टाइम से चल रहीं हैं


No comments: