Sunday, November 16, 2014

पीड़ित

tr. from Marcos Ana's "Victim"


थोड़ी थोड़ी देर में उसके घावों को फिर हरा करो,
उनको ठीक होने के लिए  छोड़ो। 
उसके दर्द से हमेशा ताज़ा खून निकलता रहे,
और दुख उसके अंतड़ियों में हमेशा जीता रहे। 

अगर वो सब छोड़ के भागेतो उसका पीछा करोशोर मचाओ 
की वो कसूरवार हैउसको भूलने के इजाज़त नहीं है। 
उसके मुंह पर काली मिट्टि के ढेर फैको।
अगर उसके शब्दों के बीच फूल खिल रहें हैं,
तो उन पौधों को अपने पैरों तले कुचलो,
जब तक वो किसी मुर्दे के हाथ की तरह पीले  पड़ जाएँ। 
बर्बाद करो।  उसे बर्बाद करो। उसके दिल से वो गाना रिहा 
नहीं होना चाहिएजो उसमे अभी तक बंद हैं।

क्यूंकि यही तुम्हारा काम हैमेरे से कितना अलग;
अगर कोई नदी चाँद से बात करने ऊपर चढ़ने को हो,
तो किसी पहाड़ से उसका बहाव रोक दो।
अगर कोई सिताराअपनी दुरी को भूल,
नीचे दौड़ेकिसी लड़के के कच्चे होंठों की तरफ,
तो पुरे सौर मंडल में उसकी तौहीन करो।
अगर कोई हिरन आज़ादी और जंगलों के सपने देखे 
तो उसको कुत्तों की तरह पट्टा बाँध दो।
अगर कोई मछली बिन पानी जीना सीख जाए,
तो उससे ज़मीनतट सब छीन लो।
अगर कोई हाथ हवा को हलके-हलके छुएं,
जैसे मस्तियों भरा बदन छु रहे हों,
तो वो हाथ काट दो।
अगर सहर कुछ ज़्यादा हि रौशन हो
तो रात की सब्ज़ तलवार उसकी आँखों में घोंस दो।

अगर किसी आदमी का दिल 
हवा से बातें करने लगे,
उसको पत्थरों से लाद नीचे ले आओ 
घुटने उसकी छाती से बाँधडुबा दो उसको।



Marcos Ana

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