Sunday, November 16, 2014

उग्रवादी

tr. from Langston Hughes' "Militant"

जो कर सकते हैं
वो खाएं शर्म की रोटी,
मैं नहीं कर सकता,
बिना शिकायत किये
जोरों से, लम्बे समय तक,
अपने हलक में उसके कड़वेपन
का एहसास लिए, और रूह तक
यह जान कर की ये गलत है,
मेरे ईमानदारी के काम की
तुम इतनी कम कीमत लगाते हो,
मेरे सच्चे सपनों को देख
मेरे चेहरे पर थूकते हो,
इसीलिए आज
मैंने मुट्ठी भींच रखी है   
तुम्हारे चेहरे के लिए


Langston Hughes
 

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