Wednesday, March 11, 2015

रोटी और तारे

tr. from James Oppenheim's "Bread and Roses" (1911), inspired by Rose Schneiderman's slogan "The worker must have bread, but she must have roses, too"
अब चल पड़े हम सब तो, इस सुन्दर से दिन में,
लाखों रसोइयाँ ऐसी जिनके चूल्हे बंद पड़े, फिर
जग उठेंगी देखो, सूरज देगा अंगारे, सब सुनेंगे
हमको गाते -- रोटी और तारे -- रोटी और तारे
अब चल पड़े हम सब तो, मर्दों के संग लड़ें,
वो हैं हमारे से ही, हमारे बिन कैसे बढ़ें,
थक कर अब न बहेंगे, जीवन के ये पल सारे,
तन भूखा है पर दिल भी, दो हमको रोटी पर दो तारे
अब चल पड़े हम सब तो, अनगिनत जो नहीं रहीं
अब भी गीतों में हमारे लगाएं रोटी की पुकार वहीं
कहाँ कला, कहाँ सौंदर्य, मेहनत के थे उनके दिन सारे
इसीलिए मांगे हम रोटी पर उसके संग हम मांगे तारे


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