Tuesday, July 28, 2015

चाहे तुम बोलो

कि मेरा इश्क़ बेईमान
कि मुझमें बस अभिमान
कि मैं हरदम परेशान
फिर भी मैं तुम्हारे संग रहूंगी

चाहे तुम बोलो
कि मैं न अल्ल्हड़ न जवान
कि मुझे बस अपना ध्यान
कि मेरे मन में शैतान
फिर भी मैं तुम्हारे संग चलूंगी

पर अगर तुम बोले
कि मेरी कवितायेँ तुम्हें जमी नहीं
तो जान लो, मेरे लिए मर्दों की कमी नहीं



tr. from Dorothy Parker's 'Fighting Words'

Dorothy Parker

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