Monday, September 7, 2015

किसी को राजा पसंद है, किसी को रानी,

अच्छा है मुझे दोनों पसंद है, पर है इक
परेशानी, कभी सोचता हूँ कि ये झूलम-
-झूला मुनासिब है या नहीं, तो कभी ये
कि शायद मेरी दोहरी नज़र इक इशारा है,
कि मैं जमने वाला नहीं, कि मन आवारा है - 
यूँ अलग-अलग टोलियां हैं, गे और स्ट्रेट,
इनमें मैं कौन हूँ (पता नहीं!) स्ट्रे? या ग्रेट?

tr. from Vikram Seth's 'Dubious'

विक्रम सेठ
 

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