Thursday, October 8, 2015

मुझे मालूम है पिंजरे का पंछी क्यों गाता है - Maya Angelou

tr. from Maya Angelou's 'I know why the caged bird sings'

आज़ाद पंछी
  तो हवा की पीठ पर बैठ कर
नदी के संग तैरता है
  और जहाँ धारा थमती है
वहां अपने पंख हलके से
  सूरज की किरणों में डुबाता है
और सारे आसमान को अपना बताता है

लेकिन जो पंछी
  अपने पिंजरे में ही सरकता है,
वो शायद ही देख पाता हो
  अपने गुस्से की सलाखों के पार,
उसके पंख यूँ कतरे हुए हैं, पैर यूँ बंधे हुए हैं,
  पर उसकी जुबां पर गाना है तैयार    

उसका गला कंपकपाता है
  फिर भी पिंजरे का पंछी गाता है
अंजान-सी चीज़ों के बारे में  
  जिनको वो रह-रह चाहता है   
और उसकी धुन सुनने में आती है
  दूर नदी-पहाड़े में
क्यूंकि पिंजरे का पंछी गाता है
  आज़ादी के बारे में 

आज़ाद पंछी तो सोचता है
  सिर्फ हलकी हवा का, जो पेड़ों में सर-सराये
लॉन के केचुओं का, जो उसी की आस लगाएं
  और फिर सारे आसमान को अपना बताता है 

लेकिन पिंजरे का पंछी तो खड़ा है
  अपने ही सपनो की मज़ारों पर,
उसकी परछाई तक चिल्लाती है
  बुरे ख्वाबों की बहती धारों पर
उसके पंख यूँ कतरे हुए हैं, पैर यूँ बंधे हुए हैं,
  पर उसकी जुबां पर गाना है तैयार

उसका गला कंपकपाता है
  फिर भी पिंजरे का पंछी गाता है
अंजान-सी चीज़ों के बारे में  
  जिनको वो रह-रह चाहता है   
और उसकी धुन सुनने में आती है
  दूर नदी-पहाड़े में
क्यूंकि पिंजरे का पंछी गाता है
  आज़ादी के बारे में 

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