Monday, January 18, 2016

इंसान की कीमत कितनी कम लगाई जाती है - रोहित वेमुला

इंसान की कीमत
कितनी कम लगाई जाती है

बस एक छोटी सी पहचान दी जाती है
फिर जिसका जितना काम निकल आये -
कभी एक वोट,
कभी एक आंकड़ा,
कभी एक खोखली सी चीज़

कभी माना ही नहीं जाता कि इंसान
आखिर एक जीवंत मन है

एक अद्भुत सी चीज़ है
जिसे तारों की धूल से गढ़ा गया है

चाहे किताबों में देख लो, चाहे सड़कों पर,
चाहे उसे लड़ते हुए देख लो,
चाहे जीते-मरते हुए देख लो

रोहित वेमुला
 

Sunday, January 17, 2016

For Rohith Vemula

They might have rope enough
for his body,

have they rope enough
for star dust?

Wednesday, January 13, 2016

Saturday, January 9, 2016

The Poem said to the Doggerel

you'll never be like me,
you don't shatter the heart,
you don't burn into skin,
your canvas is small
& your themes are thin,
whoever reads me touches
the skies by the time I'm done,

The Doggerel replied: but I'm fun.